मेरे प्यारे वतन

 मेरे प्यारे वतन  


मेरे वतन याद तेरी आएगी मुझको 

कैसे छोड़ जाता कोई, पैसे के खातिर तुझको 

कुछ कह नहीं सकते ऐसे व्यक्ति के  जमीरी  पर

लानते भेजता हूँ ,उसकी ऐसी अमीरी पर 


कईओ  प्राण गवाए है इसे भूल न जाना 

आज़ादी में साँस लेने वालो याद ये रखना 

गद्दारी नहीं करना तुम चंद  सिक्को पर 

उनको प्राणो की आहुति  दी ,तुम याद भी रखना 


 

तेरी माटी  में मिल जाये ये चाहत    है मेरी 

तुझे कोई आँच न आये ये हसरत है मेरी 

घर बार छोड़ा मैंने बस तेरे खातिर

  अब तू ही मेरी दुनिया  हो ये हसरत है मेरी     


तेरी तरफ उठे जो कोई अगर बुरी नजर

घात उस पे करने को मैं हूँ  सदा तत्पर

मुकाबला करूँगा उसका मैं  वही देखकर 

जान भी दे देंगे हम खिलौना समझ कर  

याद करते रहना हमेशा ऐसे लोगो को,

आजादी के खातिर जिन्होंने छोड़ा भोगो को  

नमन करता  है विनय उन मतवाले वीरो  को 

नम  आंख हो ही जाती याद  करके ऐसे हीरों  को  



(मौलिक रचना)

                                                  

 विनय कुमार सिंह 


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